Liner Focused Shockwave Therapy


Liner Focused Shockwave Therapy for the treatment of ED(Erectile Dysfunstion).

Shockwave therapy is successfully used for the treatment of muscle-tendon tissue and tendon attachments. Shock waves are sound impulses with a lot of energy, which can move like waves in the depth.

Due to the short treatment duration per session and the high success rate, there is an ever-increasing demand for shockwave treatments. Specific complaints such as a tennis elbow or a heel spur are annoying conditions that often do not completely disappear with treatments. Shockwave therapy is successfully used in the treatment of muscle-tendon tissue and tendon attachments.


  • Innovative treatment of causes, not sysptoms.
  • Simple painless outpatient-treament.
  • For a better quality of life and greater spontaneity.
  • Trustworthy and scientifically proven.
  • LSTC-ED A comprehensive treatment.
  • Effect lasts serveral month up to years.

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इरेक्टाइल डिसफंक्शन ट्रीटमेंट; दुनिया की मानी अत्याधुनिक जर्मन तकनीक अब आपके शहर में


-जयपुर के बाद प्रदेश की दूसरी मशीन सिर्फ उदयपुर में, दक्षिण राजस्थान सहित जोधपुर, भीलवाड़ा, अजमेर तक मिलेगी सुविधा-

क्या आप जानते हैं कि आज के दौर में डायबिटीज, हाईपरटेंशन और स्ट्रोक की तरह कुछ ऐसी बीमारियां भी आपको गिरफ्त में ले रही हैं, जो लाइफ स्टाइल से जुड़ी हैं। और हकीकत यह है कि भागमभाग और दिनभर के बिजी शिड्यूल में इन बीमारियों को अनदेखा कर आप ऐसी गंभीर तकलीफों को न्योता दे रहे हैं, जो एक तरफ तो सेक्सुअल लाइफ को बिगाड़ रही हैं तो दूसरी तरफ झिझक के कारण आप इनका जिक्र भी नहीं कर सकते। जी हां, बात हो रही है सेक्सुअल लाइफ की, जिसमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी स्तंभन दोष सबसे अहम परेशानी के रूप में उभरकर आ रहा है। यह वह समस्या है, जिसमें लिंग में पर्याप्त उत्तेजना नहीं आ पाती और यह स्थिति शारीरिक संबंधों में बाधक बन जाती है। यह गंभीर बीमारी है, लेकिन सुखद बात यह है कि इस परेशानी का इलाज अब आपके शहर में भी है। यह जर्मनी की वह अत्याधुनिक तकनीक है, जिसे देश ही नहीं, दुनिया भर के स्पेशियलिस्ट डॉक्टर भी कारगर मान चुके हैं। शहर में सूरजपोल-सिटी स्टेशन रोड स्थित कशिश क्लीनिक पर जर्मन टेक्नोलॉजी की लिनियर शॉकवेव टिश्यू कवरेज (LSTC) मशीन : ईडी उपलब्ध है, जहां अब यह इलाज उपलब्ध होगा। क्लीनिक के ओनर और स्पेशियलिस्ट डॉ. महेंद्र राजपूत दावे के साथ कहते हैं कि इलाज की दूसरी विधियों के उलट लिनियर शॉक वेव थैरेपी इरेक्टाइल डिसफंक्शन का स्थायी उपचार और समाधान करती है।



आसानी इतनी कि... न ऑपरेशन का दर्द, न दवा का झंझट, कोई परहेज नहीं और साइड इफेक्ट भी जीरो


लिनियर शॉकवेव टिश्यू कवरेज मशीन : ईडी पर थैरेपी से इलाज की खास बात यह है कि इसमें न कोई ऑपरेशन होता है, न कोई दवा लेनी पड़ती है और न ही किसी भी तरह का कोई परहेज रखने की जरूरत होती है। मरीज को महज तीन या जरूरत होने पर पांच थैरेपी के बाद इरेक्टाइल डिसफंक्शन से स्थायी रूप से मुक्ति मिल सकती है। इसे थैरेपी साइकल कहते हैं, जो 20 से 25 मिनट तक का होता है। हर दो दिन के अंतराल में थैरेपी दी जाती है। यह इलाज करवाने वाले 80 फीसदी से ज्यादा मरीजों का कहना है कि तीन से पांच साइकिल में उन्होंने इरेक्टाइज डिसफंक्शन से राहत मिली है। जबकि डॉ. राजपूत बताते हैं कि थैरेपी साइकिल बढ़ना कई बार मरीज में बीपी, डायबिटीज या किसी और बीमारी के होने पर निर्भर करता है। इसके बावजूद 6 साइकिल के बाद पूरी तरह सुधार निश्चित है।


रिजल्ट : ब्लॉकेज दूर, रीजनरेट होते हैं आर्टरीज और टिश्यूज, जीरो साइड इफेक्ट के साथ दोहरे फायदे

लीनियर शॉक वेव थैरेपी असल में लिंग की धमनियों (आर्टरीज) के ब्लॉकेज (अवरोध) दूर करती है। साथ ही आर्टरीज और टिश्यूज (ऊतकों) को रीजनरेट भी करती है। इससे धमनियों में ब्लड फ्लो (खून का प्रवाह) सुधरता है और नई रक्त धमनियां उभरती, तैयार होती हैं। थैरेपी पूरी होने के बाद बेहतरीन नतीजे लिंग के आकार और फंक्शन में सुधार के साथ देखने को मिलता है। यानी इससे उत्तेजना में बढ़ोतरी होती है। डॉ. महेंद्र राजपूत के मुताबिक ज्यादातर लोग बरसों तक इरेक्टाइल डिसफंक्शन की तकलीफ झेलने के बाद उत्तेजना लाने वाली विदेशी दवाइयाें, तेल आदि का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी कम नहीं होते। क्योंकि एक तरफ तो मूल समस्या का समाधान ही नहीं हो पाता दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इरेक्शन के कारण लिंग कुदरती तौर पर फंक्शन नहीं कर पाता। इससे दूसरी तरह की जटिलताएं बढ़ने की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता।


थोड़ी भी तकलीफ पर जरूरी है सही जांच और उपचार

डॉ. महेंद्र राजपूत बताते हैं कि लिंग में तनाव और उत्तेजना नहीं या कम होने की परेशानी को हल्के में कतई नहीं लिया जाना चाहिए। सही निदान और अच्छा उपचार न मिले तो साइकोलॉजिकल ट्रोमा (मनाेवैज्ञानिक सदमा) हो सकता है। इसे इस तरह समझें कि जिस तरह बुखार मामूली मर्ज है, लेकिन यह किसी दूसरी बड़ी घातक बीमारी का संकेत भी हो सकता है। वैसे ही आपकी बॉडी के इस अहम अंग में उत्तेजना नहीं या कम होना किसी बड़े यौन रोग की ओर इशारा हो सकता है। इन हालात में लोग दवा, ऑन डिमांड ट्रीटमेंट, कुछ नियमित दवाइयां, इंजेक्शन आदि ले लेते हैं, लेकिन ये सब लिंग की धमनियाें-ऊतकों की शिथिलता को बायपास कर इरेक्शन ला देती हैं। इसके बिलकुल उलट लीनियर शॉकवेव टिश्यू कवरेज मशीन अपने नाम की तरह शॉक वेव्ज के जरिए पूरे अंग को सुधार कर पूरी तरह से एक्टिव करती है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।


पहले मानसिक थी यह परेशानी, बदलती लाइफ स्टाइल से शारीरिक हुई : डॉ. एन. राजपूत


क्लीनिक के तीसरी पीढ़ी के संचालक डाॅ. एन. राजपूत बताते हैं कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन की परेशानी कुछ दशक पहले तक मानसिक हुआ करती थी, लेकिन अब बदलते दौर के साथ अपना मोड बदलते हुए यह शारीरिक हो गई है। कारण बदलती लाइफ स्टाइल है। संतुलित और पौष्टिक आहार की जगह अब पिज्जा-बर्गर, नूडल्स जैसे फास्ट फूड ने ले ली है। इसलिए शरीर की इम्युनिटी पावर (प्रतिरक्षा शक्ति) क्षीण हो रही है। दूसरी बड़ी वजह आईटी है। बच्चे इंटरनेट से कनेक्ट हैं, जहां हर तरह का अच्छा-बुरा कंटेंट उपलब्ध है और कामकाजी पेरेंट्स को इतनी निगरानी का समय तक नहीं कि बच्चे नेट पर देख और सर्फ क्या कर रहे हैं। किशोर अवस्था में विपरीत लिंग को लेकर उत्सुकता भी कम नहीं रहती है और बच्चे सेक्सुअल कंटेंट देखकर जाने-अनजाने सही उम्र से पहले ही इन एक्टिविटीज के गर्त में जा रहे हैं। कम उम्र की यही नादानियां अकसर शादीशुदा जिंदगी पर असर डालती हैं।



इसलिए कर सकते हैं यकीन, क्योंकि चौथी पीढ़ी बरकरार रखे हुए है हजारों जिंदगियों की ‘कशिश’




उदयपुर में दक्षिण राजस्थान की पहली लिनियर शॉकवेव टिश्यू कवरेज मशीन लेकर आने वाले इस कशिश क्लीनिक का इतिहास और इसके प्रति मरीजों का विश्वास चार पीढ़ियों पुराना है। फिलहाल यह क्लीनिक डॉ. एम.एस. राजपूत अपने पिता वैद्यराज एन. राजपूत की देखरेख में संचालित कर रहे हैं। वैद्यराज एन. राजपूत बताते हैं कि उनके दादा हकीम पेरूमल राजपूत पीटी साहब के नाम से मशहूर थे, जिन्होंने सन 1934 में जयपुर में ‘अमर शफाखाना’ की शुरुआत की थी, जिसे उन्होंने 1971 तक न सिर्फ चलाया, बल्कि हजारों मरीजों को राहत देते हुए बढ़ाया भी। पीटी साहब जड़ी-बूटियाें से इलाज करते थे। ज्ञान की यही विरासत उन्होंने सन 1961 में अपने बेटे वैद्यराज डॉ. साहब एन.पी. राजपूत (नाथूसिंह राजपूत) को सौंपी। पिता नाथूसिंह जी ने उन्हीं के नक्शे-कदम पर खानदानी और गुप्त नुस्खों से मरीजों काे इलाज के साथ राहत दी। वे 1962 से ही पिता के साथ जुड़ गए थे और 1989 तक शफाखाना सफलतापूर्वक चलाया। साथ ही बेटे वैद्यराज एन. राजपूत को तैयार कर खानदानी धरोहर 1978 में सौंपी, जो आज तक क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं। इसी बीच साल 2001 में उदयपुर कशिश क्लीनिक की शुरुआत के साथ उनके पुत्र डाॅ. महेंद्र राजपूत पिता के हमकदम बने हैं।


LSTC से मिलेगा उदयपुर संभाग सहित भीलवाड़ा, अजमेर और जोधपुर के मरीजों को लाभ


कशिश क्लीनिक पर लाई गई हाईटेक LSTC मशीन का लाभ उदयपुर संभाग सहित भीलवाड़ा, अजमेर और जोधपुर के मरीजों को भी मिलेगा। इसके लिए इन सभी शहरों में ऑन डिमांड कैंप लगाए जाएंगे। डॉ. महेंद्र राजपूत ने बताया कि गुप्तांग की शिथिलता का यह इलाज अब तक राजस्थान में सिर्फ जयपुर में उपलब्ध था, लेकिन उदयपुर में शुरुआत के बाद यह उपचार सुविधा दक्षिण राजस्थान के इस संभाग सहित भीलवाड़ा, अजमेर जिले और जोधपुर संभाग के मरीजों को भी सुलभ होगी। यानी जयपुर से ज्यादा दूरी वाले शहरों के मरीजों के समय और धन दोनों की बचत होगी।


English

  • Innovative treatment of causes, not sysptoms.
  • Simple painless outpatient-treament.
  • For a better quality of life and greater spontaneity.
  • Trustworthy and scientifically proven.
  • LSTC-ED A comprehensive treatment.
  • Effect lasts serveral month up to years.

Hindi

  • बीमारी के कारणों का उन्नत उपचार, लक्षणों का नहीं
  • सरल, दर्द रहित और बिना अस्पताल में भर्ती इलाज
  • बेहतरीन गुणवत्ता और ज्यादा से ज्यादा सहजता के लिए
  • भरोसेमंद होने के साथ वैज्ञानिक रूप से प्रामाणिक
  • LSTC-ED; इसमें हैं व्यापक उपचार
  • कई महीनों से वर्षों तक रहता है असर

English

  • Credibility and evidence are important to us
  • A multicenter, placebo-controlled study of patients found that treatment was successful in 81.3%
  • of patients, as measured and defined by IIEF scores
  • *Treatment of Erectile Dysfunction with PiezoWave2 device. Application of Low Intensity Shockwaves Novel Linear Shockwave Tissue Coverage (LSTC-ED*) technique. A Prospective, Multicentric, Placebo-controlled Study.

Hindi

  • हमारे लिए अहम है विश्वसनीयता और प्रमाण
  • बहुस्तरीय, प्रयोगिक दवा नियंत्रित अध्ययन के अनुसार
  • 81.3 प्रतिशत
  • रोगियों में यह उपचार सफल पाया गया है (इंटरनेशनल इंडेक्स ऑफ इरेक्टाइल फंक्शन के स्कोर के मुताबिक)
  • *स्तंभन अक्षमता या पौरुषी क्षमता की कमी में पीज़ोवेव-2 उपकरण से उपचार लो इंटेंसिटी शॉकवेव्स नोवेल लीनियर शॉकवेव टिशू कवरेज (LSTC-ED*) तकनीक का अनुप्रयोग है।

Arterial Factors in Erectile Function!

Reduced arterial inflow reduces venous compression, resulting in an insufficient erection. Arteriosclerosis is one of most common causes of ED.

Risk Factors

  • Chronic nicotine abuse
  • Diabetes mellitus
  • High blood pressure
  • Chronic renal disease

स्तंभन क्रिया में ये हैं धमनियों से जुड़े कारक

अल्प धमनी प्रवाह शिराओं से जुड़े दबाव को कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप एक अपर्याप्त उत्तेजना का निर्माण होता है। आर्टेरियोस्क्लेरोसिस ईडी के सबसे सामान्य कारणों में से है। धमनी से जुड़ी यह जटिलता स्तंभन दोषों में सबसे बड़ी और प्रमुख है।

ये हैं जोखिम के कारक

  • तंबाकू का लंबे समय से इस्तेमाल
  • मधुमेह
  • उच्च रक्त चाप
  • लंबे समय से चल रही गुर्दे की बीमारी

Treatment

Treatment is carried out on an outpatient basis without anesthesia. It is painless and only takes a few minutes. The therapy head is positioned above the cavernous bodies and moved longitudinally along the penis. Treatment should be administrated once or twice a week; a full course of treatment in 4-6 sessions. There are no known side effects.

उपचार

एक आउट पेशेंट आधार यानी अस्पताल में भर्ती किए बना उपचार किया जाता है। यह दर्द रहित है और इसमें केवल कुछ मिनट लगते हैं। थैरेपी हेड को कैवर्नस बॉडीज यानी कटि या कमर के हिस्से के ऊपर स्थित किया जाता है और लिंग के पास लंबे समय तक रखा जाता है। यह उपचार सप्ताह में एक या दो बार किया जाना चाहिए; 4-6 सत्रों में उपचार का एक पूरा कोर्स होना चाहिए। इसमें कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

The Mechanism of Action!

Mechanical stimuli can influence many of the cellular functions of living tusssue. Extracorporeal shockwaves- an established treatment in modern medicine for more than 30 years- function as mechanical stressors which trigger biochemical changes in living tussues.

ED-specific Effect :

  • Angiogenesis (Vascularization)
  • Improved microcirculation

ऐसे काम करता है हमारा तंत्र

मैकेनिकल उत्तेजनाएं जीवित ऊतकों के कई सेलुलर कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं। एक्सट्रॉकोर्पोरियल शॉकवेव्स आधुनिक चिकित्सा में 30 से ज्यादा साल से स्थापित है, जो कि उपचार में यांत्रिक तनाव के रूप में काम करता है। जीवित ऊतकों में जैव रासायनिक परिवर्तनों को ट्रिगर करता है।

स्तंभन अक्षमता : विशिष्ट प्रभाव

  • वाहिका जनन (वाहिका क्षमतावर्धन)
  • सूक्ष्म परिसंचरण में सुधार

Treatment Technique

LSTC-ED (logo)

The LSTC-ED Technique is a quick and comprehensive treatment covering the entire cavernous bodies. The therapy source is placed at right angles to the cavernous bodies and moved longitudinally along the panis (the cavernous bodies) and the perineum (crura of the penis). This results in maximum, homogeneous transfer of energy; treatment is quick and lasts only a few minutes.

उपचार की तकनीक

एसएसटीसी-ईडी का लोगो

LSTC-ED तकनीक संपूर्ण कैवर्नस निकायों यानी कटि क्षेत्र को कवर करने वाला एक त्वरित और व्यापक उपचार है। थैरेपी स्रोत को कमर से जंघा वाले भाग में समकोण पर रखा जाता है और लिंग (कैवर्नस बॉडीज) और पेरिनियम यानी अंडकोष और गुदा के बीच वाले भाग पर लंबे समय तक रखा जाता है। इससे ऊर्जा का अधिकतम और एक जैसा स्थानांतरण होता है। यह उपचार त्वरित है और प्रक्रिया केवल कुछ मिनट के लिए रहती है।

LSTC-ED

  • A unique therapy concept
  • Treatment of erectile dysfunction using linear focused Piezo Shockwaves.
  • New... effective... Scientifically proven.

एलएसटीसी-ईडी

  • इलाज की एक बेमिसाल संकल्पनाहीं
  • Piezo Shockwaves का रेखाओं पर केंद्रित उपयोग कर स्तंभन दोष का उपचार
  • ये है नया... असरदार... वैज्ञानिक रूप से प्रामाणिक

Erectile Function

Healthy blood vessels matter!

Erection is the result of a complex synergy between blood vessels. the nervous system, hormones and muscles. During an erection there is increased blood flow to the penis, which in turn increases the pressure. Sufficient blood flow to the cavernous bodies plays an most important role in irectile function.

स्तंभन क्रिया

मायने रखती हैं स्वस्थ रक्त वाहिकाएं

इरेक्शन यानी स्तंभन या लिंग का कड़कपन रक्त वाहिकाओं के बीच एक जटिल तालमेल का परिणाम है। यह तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और मांसपेशियाें के बीच सामंजस्य है। स्तंभन के दौरान लिंग में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जो दबाव को बढ़ाता है। कटि और जंघा क्षेत्र के निकायों में रक्त का भरपूर प्रवाह स्तंभन प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Richard Wolf logo... Elevation think in value

We have developed a solution. It is innovative and nothing short of groundbreaking!

The continued development of the Piezo shockwave technology along with the use of a therapy source with an extended linear therapy focus has led to a decisive breakthrough in the search for ways of using shockwaves to treat vascular dysfunction. Used in combination with the new. optimized therapy concept LSTC-ED. The application technique and therapy outcomes have improved significantly.

रिचर्डवोल्फ लोगो...

हमने एक समाधान विकसित किया है। यह अभिनव है और अभूतपूर्व से कम कुछ नहीं है।

विस्तृत रेखीय उपचार केंद्रित होने और थैरेपी स्रोत के उपयोग के साथ पीजो शॉकवेव तकनीक के निरंतर विकास ने नसो की शिथिलता के इलाज के लिए शॉकवेव्स का उपयोग करने के तरीकों की खोज में निर्णायक सफलता का नेतृत्व किया है। यह नए के साथ संयोजन है। अनुकूलित चिकित्सा विचार LSTC-ED से एप्लीकेशन तकनीक और चिकित्सा परिणामों में काफी सुधार हुआ है।

Existing Treatment Options

  • PDE-5 inhibitors
  • Injections (Cavernous body auto-injection therapy)
  • Vaccum pumps

इलाज के मौजूदा विकल्प

  • पीईडी-5 इनहिबिट
  • इंजेक्शन (कटि और जंघा क्षेत्र की ऑटो इंजेक्शन थैरेपी)
  • वैक्यूम पंप

Potential

Disadvantegs and problems

  • PDE5-i
  • Only treats the symptoms
  • Expensive
  • No sexual spontaneity
  • Decreased self-confidence
  • Psychological stress

संभावनाएं

नुकसान और समस्याएं

  • ये सिर्फ लक्षणों का समाधान है
  • बेहद महंगा
  • शारीरिक संबंध में सहजता नहीं रहती
  • आत्मविश्वास कम हो जाता है
  • मनोवैज्ञानिक तनाव


Using shockwaves to treat ED

Worldwide more than 160 million of men suffer from ED.

German data: 19% of men are affected*

  • 2% (aged 30 – 39 years)
  • 10% (aged 40 – 49 years)
  • 16% (aged 50 – 59 years)
  • 34% (aged 60 – 69 years)
  • 53% (aged 70 – 79 years)

*Braun et.al.
Epidemiology of erectile dysfunction: results of the Cologne Male Survey.
In: Int J Impot Res
12 (2000), Nr. 6, S. 305–11

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Forth Generation Of Sexologist, Male & Female Infertility, Psychological & Physical Problems.

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Ayurvedic Sexologist in Udaipur

When it comes to solving infertility, low sexual power, loss in sexual function, sexual dysfunction, Dr. M.S Rajput has not just pioneered Ayurvedic Sexology medication but, has successfully helped couple retain their sex life with full vigor.

When it comes to the Ayurvedic medical attention to sexual problems and infertility, we often find it hard to find a trusted and experienced doctor. This is where Dr. M.S Rajput, one of the best sexologists in Udaipur, Rajasthan delivers and provides post session care too with his remedies.

Having being situation is the same place, patients need not travel to various centers to avail treatments. They can find all facilities for infertility, sexual dysfunction remedies under one roof.

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Why Do You Need a Sexologist in Udaipur?

One of the main problems couples often face is the distance and travel in getting accredited and trustworthy Ayurvedic health care. Dr. M. S Rajput practicing in Kaya Kalp International Sex & Health Clinics has pioneered and has successfully helped many, many couples who have faced sexual health problems.

He is a graduate B.A.S.M with 20+ years of individual couple therapy experience alongside curing sex problems. Having a doctor who understands your need for care and privacy is hard to find and also to travel to multiple centers to acquire quality health care is not convenient.

So, having a top sexologist in Udaipur, Rajasthan, helps you find all the sexual health care you need under one roof, with specialized doctors for your problems.

Even if you are looking for a female sexologist in Udaipur, at Dr. M.S Rajput’s clinic you will be connected with the top doctors and himself for individual care and treatment.

Traveling to different cities is not cheap and having a doctor who sees to your sexual health and growth wholesomely is crucial to a happily married life. Sexual health and treatment is no longer a stigma and we always encourage couples to seek help throughout their journey.

Even when it comes to couples who find it hard to have a baby, science and alternative science has innovated how we start a family. We don’t have to rely on the natural way anymore if we are facing infertility.

Dr. M. S Rajput has managed to acquire years of experience in helping couples who are looking to conceive but have failed. We come with state of the art set up with IVF facilities that help couples start their families and find solace in being a family.

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FAQ'S




Erectile pathology, additionally referred to as impotence, is Associate in Nursing inability to induce Associate in a Nursing erection that may well be maintained until the tip of intercourse.


There might be several reasons like age-factor, unhealthy way, stress, depression, diabetes, strokes disorders, prostate, and cardiac-related issues etc. Surprisingly, the habit of taking medicines without consultation or prescription also leads to impotence.


Though there are many factors for Infertility or Low Sperm, some of them are the use of excessive alcohol, smoking, drugs, infections, diabetes, hypertension, irregular diet, and unorganized lifestyle etc.


Whenever there's a discharge of humor from man’s member too early, e.g. only after seeing a naked female, during foreplay or during initial seconds of inserting the penis into the vagina, which leaves both partners unsatisfied, it's called Premature or early ejaculation.


There square measure many ways and techniques that square measure useful in dominant, such issues. For examples, some men take help from regular exercises, yoga, sex therapies, individual diet charts, and counseling etc.


For some gay and bisexual individuals, the “coming out” method is complicated for others, it is not. Often lesbian, gay and bisexual individuals feel afraid, different, and alone once they 1st understand that their sexual orientation is entirely different from the community norm. This is significantly true for individuals turning into awake to their gay, lesbian, or bisexual orientation in childhood or adolescence, that isn't uncommon. And counting on their families and their communities, they will struggle against prejudice and info concerning folks that are LGBTQ. Children and adolescents could also be significantly prone to the harmful effects of bias and stereotypes. They may conjointly worry about being rejected by family, friends, co-workers, and religious establishments. Some gay individuals ought to worry concerning losing their jobs or being vexed in class if their sexual orientation became acknowledge.

Unfortunately, LGBTQ individuals are at the next risk for physical assault and violence than are heterosexuals. Studies worn out California within the mid-1990s showed that just about fifth twenty percent common fraction|simple fraction of all lesbians United Nations agency took part within the study, and over the simple fraction of all gay men United Nations agency participated, had been the victim of a hate crime supported their sexual orientation. In another California study of approximately 500 young adults, half of all the young men participating in the survey admitted to some form of anti-gay aggression, ranging from name-calling to physical violence.

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